कहानी- रामायण में राजा दशरथ ने ये घोषणा कर दी थी कि अगले दिन राम का राज्याभिषेक किया जाएगा। इस घोषणा से कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी के साथ ही पूरी अयोध्या खुश थी, लेकिन मंथरा उदास थी। मंथरा कैकयी के विवाह में दहेज में आई थी। उसका स्वभाव बने बनाए काम को बिगाड़ने का था। उसे इसी काम में मजा आता था और वह यही कोशिश करती रहती थी कि कैसे दूसरों का नुकसान किया जाए। मंथरा कुटिल बुद्धि की महिला थी, दूसरों की बुराई और चुगली करने में उसे महारत हासिल थी। राम के राज्याभिषेक से पहले वाली रात कैकयी ने देखा कि मंथरा निराश बैठी है। रानी ने उससे कारण पूछा तो मंथरा बोली, 'आज सभी खुश हैं, लेकिन मैं दुखी हूं, क्योंकि मैं तुम्हारे हित के बारे में सोच रही हूं। राम राजा बन गया तो वह कौशल्या के साथ मिलकर तुम्हें और तुम्हारे बेटे भरत को जेल डाल देगा।' यह बात सुनकर कैकयी को बहुत गुस्सा आया और मंथरा को एक चांटा मार दिया। कैकयी बोली, 'तू राजा दशरथ, राम और कौशल्या की बुराई मेरे सामने मत कर।' मंथरा ने हिम्मत नहीं हारी, चांटा खाने के बाद भी वह धीरे-धीरे ऐसी बातें कहती रही, जिससे कैकयी का मन बदल जाए। वह कैकयी की कमजोरी बहुत अच्छी तरह जानती थी। मंथरा की कुछ बातें सुनकर कैकयी घबरा गई। उसे लगा कि ये सही बोल रही है। रानी से मंथरा से पूछा, 'अब तू ही बता, मैं क्या करूं?' मंथरा ने कहा, 'राजा दशरथ ने तुम्हें दो वरदान दे रखे हैं। तुम दोनों वरदान मांग लो। पहले वरदान में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और दूसरे में भरत का राज्यभिषेक ले लेना।' इस तरह जो कैकयी राम से बहुत प्रेम करती थी, वह मंथरा की बातों में आ गई और राम को वनवास भेज दिया। सीख - घर, व्यवसाय और समाज में हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे आसपास कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें बुराई और चुगली करने में मजा आता है। ऐसे लोग इधर की बात उधर करते हैं और बने-बनाए काम को बिगाड़ देते हैं। जब हम सुनी हुई बातों पर भरोसा करने लगते हैं तो हमारा नुकसान जरूर होता है। ऐसे लोगों से बचना चाहिए, जो निंदा करके अच्छे कामों को बिगाड़ देते हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, motivational story from ramayana, Shri ram and manthara story https://ift.tt/3rN0NGH Dainik Bhaskar जो लोग बुराई या चुगली करते हैं, उनसे सावधान रहें, वरना आपका बड़ा नुकसान हो सकता है
कहानी- रामायण में राजा दशरथ ने ये घोषणा कर दी थी कि अगले दिन राम का राज्याभिषेक किया जाएगा। इस घोषणा से कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी के साथ ही पूरी अयोध्या खुश थी, लेकिन मंथरा उदास थी।
मंथरा कैकयी के विवाह में दहेज में आई थी। उसका स्वभाव बने बनाए काम को बिगाड़ने का था। उसे इसी काम में मजा आता था और वह यही कोशिश करती रहती थी कि कैसे दूसरों का नुकसान किया जाए। मंथरा कुटिल बुद्धि की महिला थी, दूसरों की बुराई और चुगली करने में उसे महारत हासिल थी।
राम के राज्याभिषेक से पहले वाली रात कैकयी ने देखा कि मंथरा निराश बैठी है। रानी ने उससे कारण पूछा तो मंथरा बोली, 'आज सभी खुश हैं, लेकिन मैं दुखी हूं, क्योंकि मैं तुम्हारे हित के बारे में सोच रही हूं। राम राजा बन गया तो वह कौशल्या के साथ मिलकर तुम्हें और तुम्हारे बेटे भरत को जेल डाल देगा।'
यह बात सुनकर कैकयी को बहुत गुस्सा आया और मंथरा को एक चांटा मार दिया। कैकयी बोली, 'तू राजा दशरथ, राम और कौशल्या की बुराई मेरे सामने मत कर।'
मंथरा ने हिम्मत नहीं हारी, चांटा खाने के बाद भी वह धीरे-धीरे ऐसी बातें कहती रही, जिससे कैकयी का मन बदल जाए। वह कैकयी की कमजोरी बहुत अच्छी तरह जानती थी। मंथरा की कुछ बातें सुनकर कैकयी घबरा गई। उसे लगा कि ये सही बोल रही है।
रानी से मंथरा से पूछा, 'अब तू ही बता, मैं क्या करूं?'
मंथरा ने कहा, 'राजा दशरथ ने तुम्हें दो वरदान दे रखे हैं। तुम दोनों वरदान मांग लो। पहले वरदान में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और दूसरे में भरत का राज्यभिषेक ले लेना।'
इस तरह जो कैकयी राम से बहुत प्रेम करती थी, वह मंथरा की बातों में आ गई और राम को वनवास भेज दिया।
सीख - घर, व्यवसाय और समाज में हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे आसपास कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें बुराई और चुगली करने में मजा आता है। ऐसे लोग इधर की बात उधर करते हैं और बने-बनाए काम को बिगाड़ देते हैं। जब हम सुनी हुई बातों पर भरोसा करने लगते हैं तो हमारा नुकसान जरूर होता है। ऐसे लोगों से बचना चाहिए, जो निंदा करके अच्छे कामों को बिगाड़ देते हैं।
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