Facebook SDK

Recent Posts

test

ट्रम्प और बिडेन की पहली बहस देखने के बाद मेरे दिमाग में एक विचार आया। मैंने कल्पना की कि मानो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी यह बहस सुनने के लिए जमा हुए हों, लेकिन उन्होंने इसके दौरान मनोरंजन के लिए एक खेल भी रखा। जिसमें ट्रम्प की हर हास्यास्पद या अमेरिका को शर्मिंदा करने वाली बात पर हर पोलित ब्यूरो सदस्य को व्हिस्की का एक शॉट पीना था। आधे घंटे में ही सभी सदस्य नशे में धुत हो गए। वे कुछ ऐसा देख रहे थे, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। एक अमेरिकी राष्ट्रपति की अनियंत्रित हरकतें, एक ऐसा व्यक्ति, जो पद पर बने रहने के लिए व्यग्र था, क्योंकि हारने का मतलब उन पर मुकदमा और दीवाला निकलना है। चीन के घूरने के लिए कौन दोषी है? एक महामारी को जो वुहान से शुरू हुई और जिसपर चीन में नियंत्रण हो गया, पर वह आज भी अमेरिका की अर्थव्यवस्था व नागरिकों पर उत्पात मचा रही है। जबकि, हमें दिख रहा था कि यह सब होने वाला है। जॉन हॉपकिंस कोरोना ट्रैकर के मुताबिक अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर 65.74 या कुल 2,16,000 लोगों की मौत हुई है। जबकि चीन में प्रति एक लाख पर 0.34 और कुल 4750 लोगों की मौत हुई। हो सकता है चीन झूठ बोल रहा हो। तो उसकी संख्या चार गुना कर लो, तो भी अपने लोगों की रक्षा में वह अमेरिका से बेहतर साबित हुआ। इस महीने जब व्हाइट हाउस कोरोना सुपर स्प्रैडर बना और अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरे हुए थे, चीन स्थानीय संक्रमण शून्य करने वाला था। उसके लाखों लोग एक त्योहार के लिए रेलवे स्टेशनों, बस और हवाई अड्‌डों पर उमड़ रहे थे। ब्लूमबर्ग की खबर थी, ‘यह तिमाही चीन की मुद्रा युआन के लिए पिछले 12 सालों में सर्वश्रेष्ठ रही। सितंबर में आयात-निर्यात दोनों बढ़े।’ ऐसे तो हम हुआ करते थे! ब्लूमबर्ग के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथ्वेट ने मुझसे कहा, ‘पश्चिमी सरकारों का उच्च समय 1960 में था, जब अमेरिका चांद पर मानव भेजने की होड़ में जुटा था और चीन में लाखों लोग भूख से मर रहे थे। लेकिन यह अंतिम बार था जब तीन चौथाई अमेरिकियों ने किसी सरकार पर भरोसा किया था।’ इकोनॉमिस्ट के राजनीतिक संपादक वूल्ड्रिज जोड़ते हैं कि ‘आज इतिहास का पहिया उल्टा घूम रहा है, जो पांच सौ साल पहले शुरू हुआ था, जब चीन समान रूप से आगे था। हम इन चीजों को भूल गए। चीन नहीं भूला। अगर पश्चिम जागा नहीं तो एशिया को पांच सौ साल पहले जो बढ़त थी, उसे फिर से हासिल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वर्ष हो सकता है।’ अमेरिका को पहले जैसी स्थिति हासिल करने के लिए शुरुआत कोविड-19 पर नियंत्रण की योजना से करनी चाहिए। वह चीन जैसी रणनीति नहीं अपना सकता। हमारे यहां सत्तावादी सरकार नहीं है। लेकिन हम कोरोना को रोकने में लोकतांत्रिक सहमति बनाने में नाकाम रहे। इतिहास में अमेरिका ने सत्तावादी सरकारों से लोहा लिया है। लंबी अवधि में अमेरिका की हमेशा विजय हुई है। हम युद्ध के लिए तैयार न होते हुए भी धीरे से शुरू करते हैं, लेकिन लगातार चढ़ते रहते हैं और एकजुट हो जाते हैं। लेकिन कोविड की चुनौती के खिलाफ हम अबतक एकजुट नहीं हुए हैं। ट्रम्प ने 28 मार्च को घोषणा की कि ‘हमारा देश एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ युद्ध मोर्चे पर है।’ स्वास्थ्यकर्मियों को छोड़ दें तो लोगों में युद्ध के दौरान दिखने वाली एकजुटता और बलिदान का जज्बा लगभग नदारद रहा। क्यों? इसलिए नहीं कि लोकतंत्र महामारी में शासन करने में अक्षम होते हैं। लेकिन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड ने हमसे बेहतर काम किया। सबसे बड़ा अंतर यह है कि हमारे पास एक ऐसा राष्ट्रपति है, जिसकी दोबारा पद पाने के लिए राजनीतिक रणनीति हमें विभाजित करना और विश्वास व सत्य को नष्ट करना है। 1918 की महामारी में तमाम अमेरिकियों को मास्क पहनने से कोई दिक्कत इसलिए नहीं थी, क्योंकि उनके नेता ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था और उदाहरण पेश किया था। लेकिन इस बार राष्ट्रपति ने कभी लोगों को सत्य नहीं बताया और वायरस को नकारते रहे और मास्क पहनने का मजाक उड़ाते रहे। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. डेविड काट्ज ने मार्च में मुझसे कहा था कि हमें एक राष्ट्रीय योजना की जरूरत है, ताकि अधिकतम जिंदगियों और आजीविकाओं को बचाया जा सके। उनका कहना था कि हमारी रणनीति नुकसान को न्यूनतम करने की होनी चाहिए। दुर्भाग्य से हमने ऐसी रणनीति पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं की। हमने एक-दूसरे में और संस्थानों में भरोसा खो दिया और एक स्वास्थ्य संकट से मिलकर लड़ने की भावना भी। पहले की सभी लड़ाइयों में यह भावना थी, लेकिन इस बार नहीं। मैं मानता हूं कि जो बाइडेन के जीतने की इस बार पूरी संभावना है, क्योंकि अमेरिकी जानते हैं कि हम एकजुट न होने की वजह से बीमार हैं और बाइडेन इसे पलटने में कामयाब हो सकते हैं। सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है। इस बीच, रूस और चीन, कृपया हम पर अभी हमला नहीं करना। हम वो नहीं हैं, जो हम हुआ करते थे। (ये लेखक के अपने विचार हैं) आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार China gets better, America gets sick… Thanks Trump! https://ift.tt/31pZ1zA Dainik Bhaskar सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है

ट्रम्प और बिडेन की पहली बहस देखने के बाद मेरे दिमाग में एक विचार आया। मैंने कल्पना की कि मानो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी यह बहस सुनने के लिए जमा हुए हों, लेकिन उन्होंने इसके दौरान मनोरंजन के लिए एक खेल भी रखा।

जिसमें ट्रम्प की हर हास्यास्पद या अमेरिका को शर्मिंदा करने वाली बात पर हर पोलित ब्यूरो सदस्य को व्हिस्की का एक शॉट पीना था। आधे घंटे में ही सभी सदस्य नशे में धुत हो गए। वे कुछ ऐसा देख रहे थे, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

एक अमेरिकी राष्ट्रपति की अनियंत्रित हरकतें, एक ऐसा व्यक्ति, जो पद पर बने रहने के लिए व्यग्र था, क्योंकि हारने का मतलब उन पर मुकदमा और दीवाला निकलना है। चीन के घूरने के लिए कौन दोषी है? एक महामारी को जो वुहान से शुरू हुई और जिसपर चीन में नियंत्रण हो गया, पर वह आज भी अमेरिका की अर्थव्यवस्था व नागरिकों पर उत्पात मचा रही है। जबकि, हमें दिख रहा था कि यह सब होने वाला है।

जॉन हॉपकिंस कोरोना ट्रैकर के मुताबिक अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर 65.74 या कुल 2,16,000 लोगों की मौत हुई है। जबकि चीन में प्रति एक लाख पर 0.34 और कुल 4750 लोगों की मौत हुई। हो सकता है चीन झूठ बोल रहा हो। तो उसकी संख्या चार गुना कर लो, तो भी अपने लोगों की रक्षा में वह अमेरिका से बेहतर साबित हुआ।

इस महीने जब व्हाइट हाउस कोरोना सुपर स्प्रैडर बना और अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरे हुए थे, चीन स्थानीय संक्रमण शून्य करने वाला था। उसके लाखों लोग एक त्योहार के लिए रेलवे स्टेशनों, बस और हवाई अड्‌डों पर उमड़ रहे थे। ब्लूमबर्ग की खबर थी, ‘यह तिमाही चीन की मुद्रा युआन के लिए पिछले 12 सालों में सर्वश्रेष्ठ रही। सितंबर में आयात-निर्यात दोनों बढ़े।’ ऐसे तो हम हुआ करते थे!

ब्लूमबर्ग के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथ्वेट ने मुझसे कहा, ‘पश्चिमी सरकारों का उच्च समय 1960 में था, जब अमेरिका चांद पर मानव भेजने की होड़ में जुटा था और चीन में लाखों लोग भूख से मर रहे थे। लेकिन यह अंतिम बार था जब तीन चौथाई अमेरिकियों ने किसी सरकार पर भरोसा किया था।’

इकोनॉमिस्ट के राजनीतिक संपादक वूल्ड्रिज जोड़ते हैं कि ‘आज इतिहास का पहिया उल्टा घूम रहा है, जो पांच सौ साल पहले शुरू हुआ था, जब चीन समान रूप से आगे था। हम इन चीजों को भूल गए। चीन नहीं भूला। अगर पश्चिम जागा नहीं तो एशिया को पांच सौ साल पहले जो बढ़त थी, उसे फिर से हासिल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वर्ष हो सकता है।’

अमेरिका को पहले जैसी स्थिति हासिल करने के लिए शुरुआत कोविड-19 पर नियंत्रण की योजना से करनी चाहिए। वह चीन जैसी रणनीति नहीं अपना सकता। हमारे यहां सत्तावादी सरकार नहीं है। लेकिन हम कोरोना को रोकने में लोकतांत्रिक सहमति बनाने में नाकाम रहे।

इतिहास में अमेरिका ने सत्तावादी सरकारों से लोहा लिया है। लंबी अवधि में अमेरिका की हमेशा विजय हुई है। हम युद्ध के लिए तैयार न होते हुए भी धीरे से शुरू करते हैं, लेकिन लगातार चढ़ते रहते हैं और एकजुट हो जाते हैं। लेकिन कोविड की चुनौती के खिलाफ हम अबतक एकजुट नहीं हुए हैं।

ट्रम्प ने 28 मार्च को घोषणा की कि ‘हमारा देश एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ युद्ध मोर्चे पर है।’ स्वास्थ्यकर्मियों को छोड़ दें तो लोगों में युद्ध के दौरान दिखने वाली एकजुटता और बलिदान का जज्बा लगभग नदारद रहा। क्यों? इसलिए नहीं कि लोकतंत्र महामारी में शासन करने में अक्षम होते हैं।

लेकिन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड ने हमसे बेहतर काम किया। सबसे बड़ा अंतर यह है कि हमारे पास एक ऐसा राष्ट्रपति है, जिसकी दोबारा पद पाने के लिए राजनीतिक रणनीति हमें विभाजित करना और विश्वास व सत्य को नष्ट करना है।

1918 की महामारी में तमाम अमेरिकियों को मास्क पहनने से कोई दिक्कत इसलिए नहीं थी, क्योंकि उनके नेता ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था और उदाहरण पेश किया था। लेकिन इस बार राष्ट्रपति ने कभी लोगों को सत्य नहीं बताया और वायरस को नकारते रहे और मास्क पहनने का मजाक उड़ाते रहे।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. डेविड काट्ज ने मार्च में मुझसे कहा था कि हमें एक राष्ट्रीय योजना की जरूरत है, ताकि अधिकतम जिंदगियों और आजीविकाओं को बचाया जा सके। उनका कहना था कि हमारी रणनीति नुकसान को न्यूनतम करने की होनी चाहिए।

दुर्भाग्य से हमने ऐसी रणनीति पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं की। हमने एक-दूसरे में और संस्थानों में भरोसा खो दिया और एक स्वास्थ्य संकट से मिलकर लड़ने की भावना भी। पहले की सभी लड़ाइयों में यह भावना थी, लेकिन इस बार नहीं।

मैं मानता हूं कि जो बाइडेन के जीतने की इस बार पूरी संभावना है, क्योंकि अमेरिकी जानते हैं कि हम एकजुट न होने की वजह से बीमार हैं और बाइडेन इसे पलटने में कामयाब हो सकते हैं। सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है। इस बीच, रूस और चीन, कृपया हम पर अभी हमला नहीं करना। हम वो नहीं हैं, जो हम हुआ करते थे।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार
China gets better, America gets sick… Thanks Trump!


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3khCQTJ
via IFTTT
ट्रम्प और बिडेन की पहली बहस देखने के बाद मेरे दिमाग में एक विचार आया। मैंने कल्पना की कि मानो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी यह बहस सुनने के लिए जमा हुए हों, लेकिन उन्होंने इसके दौरान मनोरंजन के लिए एक खेल भी रखा। जिसमें ट्रम्प की हर हास्यास्पद या अमेरिका को शर्मिंदा करने वाली बात पर हर पोलित ब्यूरो सदस्य को व्हिस्की का एक शॉट पीना था। आधे घंटे में ही सभी सदस्य नशे में धुत हो गए। वे कुछ ऐसा देख रहे थे, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। एक अमेरिकी राष्ट्रपति की अनियंत्रित हरकतें, एक ऐसा व्यक्ति, जो पद पर बने रहने के लिए व्यग्र था, क्योंकि हारने का मतलब उन पर मुकदमा और दीवाला निकलना है। चीन के घूरने के लिए कौन दोषी है? एक महामारी को जो वुहान से शुरू हुई और जिसपर चीन में नियंत्रण हो गया, पर वह आज भी अमेरिका की अर्थव्यवस्था व नागरिकों पर उत्पात मचा रही है। जबकि, हमें दिख रहा था कि यह सब होने वाला है। जॉन हॉपकिंस कोरोना ट्रैकर के मुताबिक अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर 65.74 या कुल 2,16,000 लोगों की मौत हुई है। जबकि चीन में प्रति एक लाख पर 0.34 और कुल 4750 लोगों की मौत हुई। हो सकता है चीन झूठ बोल रहा हो। तो उसकी संख्या चार गुना कर लो, तो भी अपने लोगों की रक्षा में वह अमेरिका से बेहतर साबित हुआ। इस महीने जब व्हाइट हाउस कोरोना सुपर स्प्रैडर बना और अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरे हुए थे, चीन स्थानीय संक्रमण शून्य करने वाला था। उसके लाखों लोग एक त्योहार के लिए रेलवे स्टेशनों, बस और हवाई अड्‌डों पर उमड़ रहे थे। ब्लूमबर्ग की खबर थी, ‘यह तिमाही चीन की मुद्रा युआन के लिए पिछले 12 सालों में सर्वश्रेष्ठ रही। सितंबर में आयात-निर्यात दोनों बढ़े।’ ऐसे तो हम हुआ करते थे! ब्लूमबर्ग के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथ्वेट ने मुझसे कहा, ‘पश्चिमी सरकारों का उच्च समय 1960 में था, जब अमेरिका चांद पर मानव भेजने की होड़ में जुटा था और चीन में लाखों लोग भूख से मर रहे थे। लेकिन यह अंतिम बार था जब तीन चौथाई अमेरिकियों ने किसी सरकार पर भरोसा किया था।’ इकोनॉमिस्ट के राजनीतिक संपादक वूल्ड्रिज जोड़ते हैं कि ‘आज इतिहास का पहिया उल्टा घूम रहा है, जो पांच सौ साल पहले शुरू हुआ था, जब चीन समान रूप से आगे था। हम इन चीजों को भूल गए। चीन नहीं भूला। अगर पश्चिम जागा नहीं तो एशिया को पांच सौ साल पहले जो बढ़त थी, उसे फिर से हासिल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वर्ष हो सकता है।’ अमेरिका को पहले जैसी स्थिति हासिल करने के लिए शुरुआत कोविड-19 पर नियंत्रण की योजना से करनी चाहिए। वह चीन जैसी रणनीति नहीं अपना सकता। हमारे यहां सत्तावादी सरकार नहीं है। लेकिन हम कोरोना को रोकने में लोकतांत्रिक सहमति बनाने में नाकाम रहे। इतिहास में अमेरिका ने सत्तावादी सरकारों से लोहा लिया है। लंबी अवधि में अमेरिका की हमेशा विजय हुई है। हम युद्ध के लिए तैयार न होते हुए भी धीरे से शुरू करते हैं, लेकिन लगातार चढ़ते रहते हैं और एकजुट हो जाते हैं। लेकिन कोविड की चुनौती के खिलाफ हम अबतक एकजुट नहीं हुए हैं। ट्रम्प ने 28 मार्च को घोषणा की कि ‘हमारा देश एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ युद्ध मोर्चे पर है।’ स्वास्थ्यकर्मियों को छोड़ दें तो लोगों में युद्ध के दौरान दिखने वाली एकजुटता और बलिदान का जज्बा लगभग नदारद रहा। क्यों? इसलिए नहीं कि लोकतंत्र महामारी में शासन करने में अक्षम होते हैं। लेकिन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड ने हमसे बेहतर काम किया। सबसे बड़ा अंतर यह है कि हमारे पास एक ऐसा राष्ट्रपति है, जिसकी दोबारा पद पाने के लिए राजनीतिक रणनीति हमें विभाजित करना और विश्वास व सत्य को नष्ट करना है। 1918 की महामारी में तमाम अमेरिकियों को मास्क पहनने से कोई दिक्कत इसलिए नहीं थी, क्योंकि उनके नेता ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था और उदाहरण पेश किया था। लेकिन इस बार राष्ट्रपति ने कभी लोगों को सत्य नहीं बताया और वायरस को नकारते रहे और मास्क पहनने का मजाक उड़ाते रहे। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. डेविड काट्ज ने मार्च में मुझसे कहा था कि हमें एक राष्ट्रीय योजना की जरूरत है, ताकि अधिकतम जिंदगियों और आजीविकाओं को बचाया जा सके। उनका कहना था कि हमारी रणनीति नुकसान को न्यूनतम करने की होनी चाहिए। दुर्भाग्य से हमने ऐसी रणनीति पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं की। हमने एक-दूसरे में और संस्थानों में भरोसा खो दिया और एक स्वास्थ्य संकट से मिलकर लड़ने की भावना भी। पहले की सभी लड़ाइयों में यह भावना थी, लेकिन इस बार नहीं। मैं मानता हूं कि जो बाइडेन के जीतने की इस बार पूरी संभावना है, क्योंकि अमेरिकी जानते हैं कि हम एकजुट न होने की वजह से बीमार हैं और बाइडेन इसे पलटने में कामयाब हो सकते हैं। सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है। इस बीच, रूस और चीन, कृपया हम पर अभी हमला नहीं करना। हम वो नहीं हैं, जो हम हुआ करते थे। (ये लेखक के अपने विचार हैं) आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार China gets better, America gets sick… Thanks Trump! https://ift.tt/31pZ1zA Dainik Bhaskar सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है 

ट्रम्प और बिडेन की पहली बहस देखने के बाद मेरे दिमाग में एक विचार आया। मैंने कल्पना की कि मानो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी यह बहस सुनने के लिए जमा हुए हों, लेकिन उन्होंने इसके दौरान मनोरंजन के लिए एक खेल भी रखा।

जिसमें ट्रम्प की हर हास्यास्पद या अमेरिका को शर्मिंदा करने वाली बात पर हर पोलित ब्यूरो सदस्य को व्हिस्की का एक शॉट पीना था। आधे घंटे में ही सभी सदस्य नशे में धुत हो गए। वे कुछ ऐसा देख रहे थे, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

एक अमेरिकी राष्ट्रपति की अनियंत्रित हरकतें, एक ऐसा व्यक्ति, जो पद पर बने रहने के लिए व्यग्र था, क्योंकि हारने का मतलब उन पर मुकदमा और दीवाला निकलना है। चीन के घूरने के लिए कौन दोषी है? एक महामारी को जो वुहान से शुरू हुई और जिसपर चीन में नियंत्रण हो गया, पर वह आज भी अमेरिका की अर्थव्यवस्था व नागरिकों पर उत्पात मचा रही है। जबकि, हमें दिख रहा था कि यह सब होने वाला है।

जॉन हॉपकिंस कोरोना ट्रैकर के मुताबिक अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर 65.74 या कुल 2,16,000 लोगों की मौत हुई है। जबकि चीन में प्रति एक लाख पर 0.34 और कुल 4750 लोगों की मौत हुई। हो सकता है चीन झूठ बोल रहा हो। तो उसकी संख्या चार गुना कर लो, तो भी अपने लोगों की रक्षा में वह अमेरिका से बेहतर साबित हुआ।

इस महीने जब व्हाइट हाउस कोरोना सुपर स्प्रैडर बना और अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरे हुए थे, चीन स्थानीय संक्रमण शून्य करने वाला था। उसके लाखों लोग एक त्योहार के लिए रेलवे स्टेशनों, बस और हवाई अड्‌डों पर उमड़ रहे थे। ब्लूमबर्ग की खबर थी, ‘यह तिमाही चीन की मुद्रा युआन के लिए पिछले 12 सालों में सर्वश्रेष्ठ रही। सितंबर में आयात-निर्यात दोनों बढ़े।’ ऐसे तो हम हुआ करते थे!

ब्लूमबर्ग के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथ्वेट ने मुझसे कहा, ‘पश्चिमी सरकारों का उच्च समय 1960 में था, जब अमेरिका चांद पर मानव भेजने की होड़ में जुटा था और चीन में लाखों लोग भूख से मर रहे थे। लेकिन यह अंतिम बार था जब तीन चौथाई अमेरिकियों ने किसी सरकार पर भरोसा किया था।’

इकोनॉमिस्ट के राजनीतिक संपादक वूल्ड्रिज जोड़ते हैं कि ‘आज इतिहास का पहिया उल्टा घूम रहा है, जो पांच सौ साल पहले शुरू हुआ था, जब चीन समान रूप से आगे था। हम इन चीजों को भूल गए। चीन नहीं भूला। अगर पश्चिम जागा नहीं तो एशिया को पांच सौ साल पहले जो बढ़त थी, उसे फिर से हासिल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वर्ष हो सकता है।’

अमेरिका को पहले जैसी स्थिति हासिल करने के लिए शुरुआत कोविड-19 पर नियंत्रण की योजना से करनी चाहिए। वह चीन जैसी रणनीति नहीं अपना सकता। हमारे यहां सत्तावादी सरकार नहीं है। लेकिन हम कोरोना को रोकने में लोकतांत्रिक सहमति बनाने में नाकाम रहे।

इतिहास में अमेरिका ने सत्तावादी सरकारों से लोहा लिया है। लंबी अवधि में अमेरिका की हमेशा विजय हुई है। हम युद्ध के लिए तैयार न होते हुए भी धीरे से शुरू करते हैं, लेकिन लगातार चढ़ते रहते हैं और एकजुट हो जाते हैं। लेकिन कोविड की चुनौती के खिलाफ हम अबतक एकजुट नहीं हुए हैं।

ट्रम्प ने 28 मार्च को घोषणा की कि ‘हमारा देश एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ युद्ध मोर्चे पर है।’ स्वास्थ्यकर्मियों को छोड़ दें तो लोगों में युद्ध के दौरान दिखने वाली एकजुटता और बलिदान का जज्बा लगभग नदारद रहा। क्यों? इसलिए नहीं कि लोकतंत्र महामारी में शासन करने में अक्षम होते हैं।

लेकिन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड ने हमसे बेहतर काम किया। सबसे बड़ा अंतर यह है कि हमारे पास एक ऐसा राष्ट्रपति है, जिसकी दोबारा पद पाने के लिए राजनीतिक रणनीति हमें विभाजित करना और विश्वास व सत्य को नष्ट करना है।

1918 की महामारी में तमाम अमेरिकियों को मास्क पहनने से कोई दिक्कत इसलिए नहीं थी, क्योंकि उनके नेता ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था और उदाहरण पेश किया था। लेकिन इस बार राष्ट्रपति ने कभी लोगों को सत्य नहीं बताया और वायरस को नकारते रहे और मास्क पहनने का मजाक उड़ाते रहे।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. डेविड काट्ज ने मार्च में मुझसे कहा था कि हमें एक राष्ट्रीय योजना की जरूरत है, ताकि अधिकतम जिंदगियों और आजीविकाओं को बचाया जा सके। उनका कहना था कि हमारी रणनीति नुकसान को न्यूनतम करने की होनी चाहिए।

दुर्भाग्य से हमने ऐसी रणनीति पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं की। हमने एक-दूसरे में और संस्थानों में भरोसा खो दिया और एक स्वास्थ्य संकट से मिलकर लड़ने की भावना भी। पहले की सभी लड़ाइयों में यह भावना थी, लेकिन इस बार नहीं।

मैं मानता हूं कि जो बाइडेन के जीतने की इस बार पूरी संभावना है, क्योंकि अमेरिकी जानते हैं कि हम एकजुट न होने की वजह से बीमार हैं और बाइडेन इसे पलटने में कामयाब हो सकते हैं। सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है। इस बीच, रूस और चीन, कृपया हम पर अभी हमला नहीं करना। हम वो नहीं हैं, जो हम हुआ करते थे।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

China gets better, America gets sick… Thanks Trump!

https://ift.tt/31pZ1zA Dainik Bhaskar सिर्फ बाइडेन की जीत अमेरिकियों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजनीतिक और भौतिक तौर पर यह जरूरी है Reviewed by Manish Pethev on October 20, 2020 Rating: 5

No comments:

If you have any suggestions please send me a comment.

Flickr

Powered by Blogger.