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3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इसके अगले ही दिन इंडियन नेवी ने भी पाकिस्तान पर हमला बोल दिया। इंडियन नेवी ने 4 दिसंबर को पाकिस्तान की नेवी पर पहला हमला जरूर किया था, लेकिन इसकी तैयारी कई महीनों पहले से शुरू हो गई थी। हुआ ये था कि लड़ाई शुरू होने से पहले अक्टूबर 1971 में उस समय के नेवी प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पूछा, "अगर हम कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रूप से कोई आपत्ति हो सकती है?" इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? इसके जवाब में एडमिरल एसएम नंदा ने कहा, "1965 में नेवी से खासतौर से कहा गया था कि वो भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करे।" इस पर इंदिरा गांधी ने कहा, "इफ देयर इज अ वॉर, देयर इज अ वॉर।" यानी अगर लड़ाई है, तो लड़ाई है। इसके बाद 2 दिसंबर 1971 को पूरा वेस्टर्न फ्लीट मुंबई से निकल गया। इस बेड़े में INS निपात, INS वीर और INS निर्घट शामिल थे। हर बोट पर 4-4 मिसाइलें थीं। इनके ठीक पीछे INS किल्टन भी चल रहा था। 4 दिसंबर की रात ठीक 10 बजकर 40 मिनट पर INS निर्घट ने पाकिस्तान के जहाज PNS खैबर पर पहली मिसाइल दागी। मिसाइल लगते ही खैबर हिल गया। उसमें मौजूद जवानों को पता ही नहीं चला कि हमला कहां से हुआ है? उन्हें लगा कि लड़ाकू विमान से हमला हुआ है। वो कुछ सोच पाते कि तभी थोड़ी देर बाद दूसरी मिसाइल चली और खैबर डूब गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नेवी के 222 जवान इसमें मारे गए। हमले के बाद जलता कराची पोर्ट। रात 11 बजे INS निपात ने पाकिस्तान के MV वीनस चैलेंजर और PNS शाहजहां पर दो मिसाइल दागी। वीनस चैलेंजर तबाह हो गया और शाहजहां को बहुत नुकसान पहुंचा। उधर 11:20 मिनट पर INS वीर ने PNS मुहाफिज पर मिसाइल दागी। मुहाफिज तुरंत डूब गई और इसमें मौजूद 33 जवानों की मौत हो गई। इसी बीच INS निपात कराची पोर्ट की तरफ बढ़ता गया। कराची पोर्ट पाकिस्तान के लिहाज से बहुत खास था। क्योंकि इसके एक तरफ पाकिस्तान नेवी का हेडक्वार्टर था और दूसरी तरफ तेल भंडार। INS निपात ने पोर्ट की ओर दो मिसाइल दागी। एक मिसाइल चूक गई, जबकि दूसरी सीधे तेल के टैंक में जाकर लगी। जबरदस्त विस्फोट हुआ। बताते हैं कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आग की लपटों को 60 किमी की दूरी से भी देखा जा सकता था। करीब 5 दिन तक ये पूरा ऑपरेशन चला। नेवी ने इसे "ऑपरेशन ट्राइडेंट" नाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन में भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के कई जवान इसमें मारे गए जबकि उसके तेल टैंक तबाह हो गए। 4 दिसंबर को शुरू हुए इस ऑपरेशन की वजह से ही हर साल 4 दिसंबर को "नेवी डे" मनाया जाता है। आज ही 96 साल पहले हुआ था गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन मुंबई की मशहूर जगहों में से एक गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया को किसी भारतीय राजा-रानी नहीं, बल्कि ब्रिटेन के राजा-रानी की याद में बनाया गया था। दरअसल, 2 दिसंबर 1911 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज-V और क्वीन मैरी पहली बार भारत आए थे। वो समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे। ये पहली बार था जब ब्रिटेन के राजा-रानी भारत आए थे। उन्हीं की याद में गेटवे ऑफ इंडिया बना। 31 मार्च 1913 को गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला बॉम्बे (अब मुंबई) के तब के राज्यपाल सर जॉर्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी। इसको जॉर्ज विटेट ने डिजाइन किया था। ये स्मार्क 26 मीटर ऊंची है और इसमें 4 मीनारें हैं। इसका केवल एक गुम्बद बनाने में ही 21 लाख रुपए का खर्च आया था। इसको बनाने में 11 साल से भी ज्यादा का समय लग गया था। ब्रिटिश राज में गेटवे ऑफ इंडिया से ही ब्रिटेन के लोग आया-जाया करते थे। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो यहीं से अंग्रेजों का आखिरी जहाज इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ था। भारत और दुनिया में 4 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं: 1860 : गोवा में मरगाव के निवासी ऑगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वो विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे। 1991 : लेबनान में आखिरी अमेरिकी बंधक को सात वर्ष की कैद के बाद रिहा कर दिया गया। 1996 : फ्लोरिडा के केप कैनवरा से मंगल ग्रह पर मानवरहित अंतरिक्ष यान मार्स पाथफाइंडर को प्रक्षेपित किया गया। 1952 : इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई। 1959 : भारत और नेपाल के बीच गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए। 1977 : मिस्र के विरुद्ध अरब मोर्चे का गठन किया गया। 1984 : हिज्बुल्लाह आतंकवादियों ने कुवैत एयरलाइन के विमान का अपहरण कर चार यात्रियों को मार डाला। 1996 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह की सतह के अध्ययन के लिए एक और अंतरिक्ष यान ‘मार्स पाथफाउंडर’ प्रक्षेपित किया। 2006 : फिलीपींस में भीषण तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत। 2008 : प्रसिद्ध इतिहासकार और प्राचीन भारतीय इतिहास की अध्ययनकर्ता रोमिला थापर को क्लोज सम्मान के लिए चुना गया। 2006 : फिलीपींस के एक गांव में तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हजार लोगों की मौत हो गई। 2012 : सीरिया में मोर्टार हमले में 29 लोगों की मौत हुई। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Today History: Aaj Ka Itihas India World December 4 | Indian Navy Day History, Great Smog of London https://ift.tt/3mJOtEc Dainik Bhaskar जब इंडियन नेवी की सर्जिकल स्ट्राइक से थर्राया था पाक, 60 किमी दूर से भी दिखी थी कराची पोर्ट की आग

3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इसके अगले ही दिन इंडियन नेवी ने भी पाकिस्तान पर हमला बोल दिया। इंडियन नेवी ने 4 दिसंबर को पाकिस्तान की नेवी पर पहला हमला जरूर किया था, लेकिन इसकी तैयारी कई महीनों पहले से शुरू हो गई थी।

हुआ ये था कि लड़ाई शुरू होने से पहले अक्टूबर 1971 में उस समय के नेवी प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पूछा, "अगर हम कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रूप से कोई आपत्ति हो सकती है?"

इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? इसके जवाब में एडमिरल एसएम नंदा ने कहा, "1965 में नेवी से खासतौर से कहा गया था कि वो भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करे।" इस पर इंदिरा गांधी ने कहा, "इफ देयर इज अ वॉर, देयर इज अ वॉर।" यानी अगर लड़ाई है, तो लड़ाई है।

इसके बाद 2 दिसंबर 1971 को पूरा वेस्टर्न फ्लीट मुंबई से निकल गया। इस बेड़े में INS निपात, INS वीर और INS निर्घट शामिल थे। हर बोट पर 4-4 मिसाइलें थीं। इनके ठीक पीछे INS किल्टन भी चल रहा था। 4 दिसंबर की रात ठीक 10 बजकर 40 मिनट पर INS निर्घट ने पाकिस्तान के जहाज PNS खैबर पर पहली मिसाइल दागी।

मिसाइल लगते ही खैबर हिल गया। उसमें मौजूद जवानों को पता ही नहीं चला कि हमला कहां से हुआ है? उन्हें लगा कि लड़ाकू विमान से हमला हुआ है। वो कुछ सोच पाते कि तभी थोड़ी देर बाद दूसरी मिसाइल चली और खैबर डूब गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नेवी के 222 जवान इसमें मारे गए।

हमले के बाद जलता कराची पोर्ट।

रात 11 बजे INS निपात ने पाकिस्तान के MV वीनस चैलेंजर और PNS शाहजहां पर दो मिसाइल दागी। वीनस चैलेंजर तबाह हो गया और शाहजहां को बहुत नुकसान पहुंचा। उधर 11:20 मिनट पर INS वीर ने PNS मुहाफिज पर मिसाइल दागी। मुहाफिज तुरंत डूब गई और इसमें मौजूद 33 जवानों की मौत हो गई। इसी बीच INS निपात कराची पोर्ट की तरफ बढ़ता गया। कराची पोर्ट पाकिस्तान के लिहाज से बहुत खास था।

क्योंकि इसके एक तरफ पाकिस्तान नेवी का हेडक्वार्टर था और दूसरी तरफ तेल भंडार। INS निपात ने पोर्ट की ओर दो मिसाइल दागी। एक मिसाइल चूक गई, जबकि दूसरी सीधे तेल के टैंक में जाकर लगी। जबरदस्त विस्फोट हुआ। बताते हैं कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आग की लपटों को 60 किमी की दूरी से भी देखा जा सकता था।

करीब 5 दिन तक ये पूरा ऑपरेशन चला। नेवी ने इसे "ऑपरेशन ट्राइडेंट" नाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन में भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के कई जवान इसमें मारे गए जबकि उसके तेल टैंक तबाह हो गए। 4 दिसंबर को शुरू हुए इस ऑपरेशन की वजह से ही हर साल 4 दिसंबर को "नेवी डे" मनाया जाता है।

आज ही 96 साल पहले हुआ था गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन

  • मुंबई की मशहूर जगहों में से एक गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया को किसी भारतीय राजा-रानी नहीं, बल्कि ब्रिटेन के राजा-रानी की याद में बनाया गया था। दरअसल, 2 दिसंबर 1911 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज-V और क्वीन मैरी पहली बार भारत आए थे। वो समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे। ये पहली बार था जब ब्रिटेन के राजा-रानी भारत आए थे। उन्हीं की याद में गेटवे ऑफ इंडिया बना।
  • 31 मार्च 1913 को गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला बॉम्बे (अब मुंबई) के तब के राज्यपाल सर जॉर्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी। इसको जॉर्ज विटेट ने डिजाइन किया था। ये स्मार्क 26 मीटर ऊंची है और इसमें 4 मीनारें हैं। इसका केवल एक गुम्बद बनाने में ही 21 लाख रुपए का खर्च आया था। इसको बनाने में 11 साल से भी ज्यादा का समय लग गया था।
  • ब्रिटिश राज में गेटवे ऑफ इंडिया से ही ब्रिटेन के लोग आया-जाया करते थे। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो यहीं से अंग्रेजों का आखिरी जहाज इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ था।

भारत और दुनिया में 4 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1860 : गोवा में मरगाव के निवासी ऑगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वो विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे।
  • 1991 : लेबनान में आखिरी अमेरिकी बंधक को सात वर्ष की कैद के बाद रिहा कर दिया गया।
  • 1996 : फ्लोरिडा के केप कैनवरा से मंगल ग्रह पर मानवरहित अंतरिक्ष यान मार्स पाथफाइंडर को प्रक्षेपित किया गया।
  • 1952 : इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई।
  • 1959 : भारत और नेपाल के बीच गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए।
  • 1977 : मिस्र के विरुद्ध अरब मोर्चे का गठन किया गया।
  • 1984 : हिज्बुल्लाह आतंकवादियों ने कुवैत एयरलाइन के विमान का अपहरण कर चार यात्रियों को मार डाला।
  • 1996 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह की सतह के अध्ययन के लिए एक और अंतरिक्ष यान ‘मार्स पाथफाउंडर’ प्रक्षेपित किया।
  • 2006 : फिलीपींस में भीषण तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत।
  • 2008 : प्रसिद्ध इतिहासकार और प्राचीन भारतीय इतिहास की अध्ययनकर्ता रोमिला थापर को क्लोज सम्मान के लिए चुना गया।
  • 2006 : फिलीपींस के एक गांव में तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हजार लोगों की मौत हो गई।
  • 2012 : सीरिया में मोर्टार हमले में 29 लोगों की मौत हुई।


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3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इसके अगले ही दिन इंडियन नेवी ने भी पाकिस्तान पर हमला बोल दिया। इंडियन नेवी ने 4 दिसंबर को पाकिस्तान की नेवी पर पहला हमला जरूर किया था, लेकिन इसकी तैयारी कई महीनों पहले से शुरू हो गई थी। हुआ ये था कि लड़ाई शुरू होने से पहले अक्टूबर 1971 में उस समय के नेवी प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पूछा, "अगर हम कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रूप से कोई आपत्ति हो सकती है?" इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? इसके जवाब में एडमिरल एसएम नंदा ने कहा, "1965 में नेवी से खासतौर से कहा गया था कि वो भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करे।" इस पर इंदिरा गांधी ने कहा, "इफ देयर इज अ वॉर, देयर इज अ वॉर।" यानी अगर लड़ाई है, तो लड़ाई है। इसके बाद 2 दिसंबर 1971 को पूरा वेस्टर्न फ्लीट मुंबई से निकल गया। इस बेड़े में INS निपात, INS वीर और INS निर्घट शामिल थे। हर बोट पर 4-4 मिसाइलें थीं। इनके ठीक पीछे INS किल्टन भी चल रहा था। 4 दिसंबर की रात ठीक 10 बजकर 40 मिनट पर INS निर्घट ने पाकिस्तान के जहाज PNS खैबर पर पहली मिसाइल दागी। मिसाइल लगते ही खैबर हिल गया। उसमें मौजूद जवानों को पता ही नहीं चला कि हमला कहां से हुआ है? उन्हें लगा कि लड़ाकू विमान से हमला हुआ है। वो कुछ सोच पाते कि तभी थोड़ी देर बाद दूसरी मिसाइल चली और खैबर डूब गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नेवी के 222 जवान इसमें मारे गए। हमले के बाद जलता कराची पोर्ट। रात 11 बजे INS निपात ने पाकिस्तान के MV वीनस चैलेंजर और PNS शाहजहां पर दो मिसाइल दागी। वीनस चैलेंजर तबाह हो गया और शाहजहां को बहुत नुकसान पहुंचा। उधर 11:20 मिनट पर INS वीर ने PNS मुहाफिज पर मिसाइल दागी। मुहाफिज तुरंत डूब गई और इसमें मौजूद 33 जवानों की मौत हो गई। इसी बीच INS निपात कराची पोर्ट की तरफ बढ़ता गया। कराची पोर्ट पाकिस्तान के लिहाज से बहुत खास था। क्योंकि इसके एक तरफ पाकिस्तान नेवी का हेडक्वार्टर था और दूसरी तरफ तेल भंडार। INS निपात ने पोर्ट की ओर दो मिसाइल दागी। एक मिसाइल चूक गई, जबकि दूसरी सीधे तेल के टैंक में जाकर लगी। जबरदस्त विस्फोट हुआ। बताते हैं कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आग की लपटों को 60 किमी की दूरी से भी देखा जा सकता था। करीब 5 दिन तक ये पूरा ऑपरेशन चला। नेवी ने इसे "ऑपरेशन ट्राइडेंट" नाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन में भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के कई जवान इसमें मारे गए जबकि उसके तेल टैंक तबाह हो गए। 4 दिसंबर को शुरू हुए इस ऑपरेशन की वजह से ही हर साल 4 दिसंबर को "नेवी डे" मनाया जाता है। आज ही 96 साल पहले हुआ था गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन मुंबई की मशहूर जगहों में से एक गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया को किसी भारतीय राजा-रानी नहीं, बल्कि ब्रिटेन के राजा-रानी की याद में बनाया गया था। दरअसल, 2 दिसंबर 1911 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज-V और क्वीन मैरी पहली बार भारत आए थे। वो समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे। ये पहली बार था जब ब्रिटेन के राजा-रानी भारत आए थे। उन्हीं की याद में गेटवे ऑफ इंडिया बना। 31 मार्च 1913 को गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला बॉम्बे (अब मुंबई) के तब के राज्यपाल सर जॉर्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी। इसको जॉर्ज विटेट ने डिजाइन किया था। ये स्मार्क 26 मीटर ऊंची है और इसमें 4 मीनारें हैं। इसका केवल एक गुम्बद बनाने में ही 21 लाख रुपए का खर्च आया था। इसको बनाने में 11 साल से भी ज्यादा का समय लग गया था। ब्रिटिश राज में गेटवे ऑफ इंडिया से ही ब्रिटेन के लोग आया-जाया करते थे। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो यहीं से अंग्रेजों का आखिरी जहाज इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ था। भारत और दुनिया में 4 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं: 1860 : गोवा में मरगाव के निवासी ऑगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वो विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे। 1991 : लेबनान में आखिरी अमेरिकी बंधक को सात वर्ष की कैद के बाद रिहा कर दिया गया। 1996 : फ्लोरिडा के केप कैनवरा से मंगल ग्रह पर मानवरहित अंतरिक्ष यान मार्स पाथफाइंडर को प्रक्षेपित किया गया। 1952 : इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई। 1959 : भारत और नेपाल के बीच गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए। 1977 : मिस्र के विरुद्ध अरब मोर्चे का गठन किया गया। 1984 : हिज्बुल्लाह आतंकवादियों ने कुवैत एयरलाइन के विमान का अपहरण कर चार यात्रियों को मार डाला। 1996 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह की सतह के अध्ययन के लिए एक और अंतरिक्ष यान ‘मार्स पाथफाउंडर’ प्रक्षेपित किया। 2006 : फिलीपींस में भीषण तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत। 2008 : प्रसिद्ध इतिहासकार और प्राचीन भारतीय इतिहास की अध्ययनकर्ता रोमिला थापर को क्लोज सम्मान के लिए चुना गया। 2006 : फिलीपींस के एक गांव में तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हजार लोगों की मौत हो गई। 2012 : सीरिया में मोर्टार हमले में 29 लोगों की मौत हुई। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Today History: Aaj Ka Itihas India World December 4 | Indian Navy Day History, Great Smog of London https://ift.tt/3mJOtEc Dainik Bhaskar जब इंडियन नेवी की सर्जिकल स्ट्राइक से थर्राया था पाक, 60 किमी दूर से भी दिखी थी कराची पोर्ट की आग 

3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इसके अगले ही दिन इंडियन नेवी ने भी पाकिस्तान पर हमला बोल दिया। इंडियन नेवी ने 4 दिसंबर को पाकिस्तान की नेवी पर पहला हमला जरूर किया था, लेकिन इसकी तैयारी कई महीनों पहले से शुरू हो गई थी।

हुआ ये था कि लड़ाई शुरू होने से पहले अक्टूबर 1971 में उस समय के नेवी प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पूछा, "अगर हम कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रूप से कोई आपत्ति हो सकती है?"

इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? इसके जवाब में एडमिरल एसएम नंदा ने कहा, "1965 में नेवी से खासतौर से कहा गया था कि वो भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करे।" इस पर इंदिरा गांधी ने कहा, "इफ देयर इज अ वॉर, देयर इज अ वॉर।" यानी अगर लड़ाई है, तो लड़ाई है।

इसके बाद 2 दिसंबर 1971 को पूरा वेस्टर्न फ्लीट मुंबई से निकल गया। इस बेड़े में INS निपात, INS वीर और INS निर्घट शामिल थे। हर बोट पर 4-4 मिसाइलें थीं। इनके ठीक पीछे INS किल्टन भी चल रहा था। 4 दिसंबर की रात ठीक 10 बजकर 40 मिनट पर INS निर्घट ने पाकिस्तान के जहाज PNS खैबर पर पहली मिसाइल दागी।

मिसाइल लगते ही खैबर हिल गया। उसमें मौजूद जवानों को पता ही नहीं चला कि हमला कहां से हुआ है? उन्हें लगा कि लड़ाकू विमान से हमला हुआ है। वो कुछ सोच पाते कि तभी थोड़ी देर बाद दूसरी मिसाइल चली और खैबर डूब गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नेवी के 222 जवान इसमें मारे गए।

हमले के बाद जलता कराची पोर्ट।

रात 11 बजे INS निपात ने पाकिस्तान के MV वीनस चैलेंजर और PNS शाहजहां पर दो मिसाइल दागी। वीनस चैलेंजर तबाह हो गया और शाहजहां को बहुत नुकसान पहुंचा। उधर 11:20 मिनट पर INS वीर ने PNS मुहाफिज पर मिसाइल दागी। मुहाफिज तुरंत डूब गई और इसमें मौजूद 33 जवानों की मौत हो गई। इसी बीच INS निपात कराची पोर्ट की तरफ बढ़ता गया। कराची पोर्ट पाकिस्तान के लिहाज से बहुत खास था।

क्योंकि इसके एक तरफ पाकिस्तान नेवी का हेडक्वार्टर था और दूसरी तरफ तेल भंडार। INS निपात ने पोर्ट की ओर दो मिसाइल दागी। एक मिसाइल चूक गई, जबकि दूसरी सीधे तेल के टैंक में जाकर लगी। जबरदस्त विस्फोट हुआ। बताते हैं कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आग की लपटों को 60 किमी की दूरी से भी देखा जा सकता था।

करीब 5 दिन तक ये पूरा ऑपरेशन चला। नेवी ने इसे "ऑपरेशन ट्राइडेंट" नाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन में भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के कई जवान इसमें मारे गए जबकि उसके तेल टैंक तबाह हो गए। 4 दिसंबर को शुरू हुए इस ऑपरेशन की वजह से ही हर साल 4 दिसंबर को "नेवी डे" मनाया जाता है।

आज ही 96 साल पहले हुआ था गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन

मुंबई की मशहूर जगहों में से एक गेटवे ऑफ इंडिया का उद्घाटन 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया को किसी भारतीय राजा-रानी नहीं, बल्कि ब्रिटेन के राजा-रानी की याद में बनाया गया था। दरअसल, 2 दिसंबर 1911 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज-V और क्वीन मैरी पहली बार भारत आए थे। वो समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे। ये पहली बार था जब ब्रिटेन के राजा-रानी भारत आए थे। उन्हीं की याद में गेटवे ऑफ इंडिया बना।

31 मार्च 1913 को गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला बॉम्बे (अब मुंबई) के तब के राज्यपाल सर जॉर्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी। इसको जॉर्ज विटेट ने डिजाइन किया था। ये स्मार्क 26 मीटर ऊंची है और इसमें 4 मीनारें हैं। इसका केवल एक गुम्बद बनाने में ही 21 लाख रुपए का खर्च आया था। इसको बनाने में 11 साल से भी ज्यादा का समय लग गया था।

ब्रिटिश राज में गेटवे ऑफ इंडिया से ही ब्रिटेन के लोग आया-जाया करते थे। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो यहीं से अंग्रेजों का आखिरी जहाज इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ था।

भारत और दुनिया में 4 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

1860 : गोवा में मरगाव के निवासी ऑगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वो विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे।

1991 : लेबनान में आखिरी अमेरिकी बंधक को सात वर्ष की कैद के बाद रिहा कर दिया गया।

1996 : फ्लोरिडा के केप कैनवरा से मंगल ग्रह पर मानवरहित अंतरिक्ष यान मार्स पाथफाइंडर को प्रक्षेपित किया गया।

1952 : इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई।

1959 : भारत और नेपाल के बीच गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए।

1977 : मिस्र के विरुद्ध अरब मोर्चे का गठन किया गया।

1984 : हिज्बुल्लाह आतंकवादियों ने कुवैत एयरलाइन के विमान का अपहरण कर चार यात्रियों को मार डाला।

1996 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह की सतह के अध्ययन के लिए एक और अंतरिक्ष यान ‘मार्स पाथफाउंडर’ प्रक्षेपित किया।

2006 : फिलीपींस में भीषण तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत।

2008 : प्रसिद्ध इतिहासकार और प्राचीन भारतीय इतिहास की अध्ययनकर्ता रोमिला थापर को क्लोज सम्मान के लिए चुना गया।

2006 : फिलीपींस के एक गांव में तूफान के बाद जमीन धंसने से लगभग एक हजार लोगों की मौत हो गई।

2012 : सीरिया में मोर्टार हमले में 29 लोगों की मौत हुई।

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